कुशवाहा के रास्ते पर पासवान के चिराग सीट बंटवारे पर 31 दिसंबर तक लोजपा का भाजपा को अल्टीमेटम

बिहार राजनीति
जनादेश न्यूज
कल तक उपेन्द्र कुशवाहा को गठबंधन धर्म निभाने की सलाह देने वाले लोजपा के स्वर कैसे बदले? क्या इसके पीछे तीन राज्यों में भाजपा की हार एक फैक्टर है? कई सवाल है.
क्या एनडीए बिहार में दलित वोटों का फिसलना स्वीकार कर पायेगा? अगर नहीं तो तो फिर भाजपा और जदयू में से कौन दल एक सीट की क़ुरबानी देकर लोजपा के लिए सात सीट का रास्ता बनाएगा?
साथ ही, ये सवाल भी बड़ा मायने रखता है कि क्या भाजपा अध्यक्ष अमित शाह इस ब्लैकमेल से शांत बैठेंगे या उचित समय पर लोजपा सुप्रीमो के खिलाफ कोई दबी हुई फाइल खोलेंगे और उन्हें पिटारे में कैद करेंगे?
एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर नसीहत देने के एक दिन बाद लोजपा संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष चिराग पासवान ने अपना स्टैंड बदल दिया।
मंगलवार को ट्वीट कर उन्होंने कहा था कि सीट बंटवारे में देरी होने से नुकसान होगा। बुधवार को एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि घर की बात घर में ही रहनी चाहिए। हमें ज्यादा सीटें नहीं चाहिए।
उधर, बुधवार को ही पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व पशुपालन मंत्री ने भाजपा को 31 दिसम्बर तक सीट बंटवारा कर लेने का अल्टीमेटम दे दिया।
इसी बीच रालोसपा प्रमुख ने सलाह दी है कि लोजपा को भी अब एनडीए से बाहर आ जाना चाहिए। रालोसपा प्रमुख ने बुधवार को ट्वीट के माध्यम से यह सलाह दी है।
बुधवार को एक खबरिया चैनल ने चिराग की बातों को ट्वीट किया तो लोजपा सांसद ने उसे रीट्वीट कर दिया। दो लाइन के इस ट्वीट में उन्होंने संकेत दे दिया कि उन्हें सीटों की संख्या को लेकर कोई शिकायत नहीं है।
लेकिन प्रदेश अध्यक्ष श्री पारस ने कहा कि उनकी पार्टी पिछले चुनाव से कम सीटों पर नहीं लड़ेगी। पत्रकारों के सवाल पर उन्होंने कहा कि 31 दिसम्बर तक सीट बंटवारा हो जाना चाहिए।
भाजपा को समय रहते यह काम कर लेना चाहिए। तरजीह नहीं मिलने पर हम किसी के पिछलग्गू बनकर नहीं रह सकते।
इसके पहले भी श्री पारस सीटों की संख्या को लेकर भाजपा को नसीहत देते रहे हैं। कुछ दिन पहले उन्होंने कहा था कि जितनी सीटों पर हम लड़े थे उससे कम पर समझौता नहीं कर सकते।
यानी सात सीट हर हाल में लोजपा को चाहिए। हालांकि सीटें बदलने की बात वह शुरू से कहते रहे हैं। साथ ही झारखंड में भी सीट की मांग करते रहे हैं।