जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने में जनभागीदारी जरूरी : कौशलेंद्र

नालंदा विविध
जनादेश न्यूज़ नालंदा 
बिहारशरीफ : जल संरक्षण अभियान और पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने में जनभागीदारी बढ़ाने के लिए पहली बार तालाब पर आजादी का जश्न मनाया गया। सिलाव प्रखंड अंतर्गत चंडी मौ के शुंगकालीन पुष्कर्णी तालाब पर आयोजित इस जश्न में सांसद कौशलेंद्र कुमार सहित कई प्रशासनिक पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, बुद्धिजीवी, समाजसेवी और दर्जनों गांव के किसान – नौजवान शामिल हुए। सांसद कौशलेंद्र कुमार ने ध्वजारोहण किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रत्येक आदमी को कम से कम पांच पौधारोपन करने और हर पंचायत में पांच तालाबों का जीर्णोद्धार करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा की हरियाली बिना जीवन में खुशहाली नहीं आ सकती है।
हरियाली के लिए पौधारोपण और उसके सिंचाई के लिए पानी बहुत जरूरी है। पारंपरिक जल स्रोतों तालाब, आहर, पइन आदि को पुनर्जीवित करने के लिए जनभागीदारी बहुत जरूरी है। सरकार और जनभागीदारी से ही इन तालाबों के अस्तित्व को पुनर्जीवित किया जा सकता है।। उन्होंने कहा कि अनाज तो दूसरे देश से मंगाया जा सकता है। लेकिन पानी के बिना भोजन नहीं बनाया जा सकता है। इसलिए नालंदा को फिर से पानीदार समाज बनाने के लिए तालाबों का जीर्णोद्धार बहुत जरूरी है। तालाब बचेंगे तभी कुएं, चापाकल और बोरिंग का जलस्तर भी बरकरार रहेगा। पीने के पानी भी मिलेंगे और सिंचाई के साधन भी होंगे। सांसद ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रांतीय स्तर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के द्वारा जल संरक्षण को लेकर बड़े पैमाने पर अभियान चलाए जा रहे हैं। इस अभियान के तहत सभी पारंपरिक जल स्रोतों को फिर से पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया गया है। सभी कुएं, आहर, पइन और तालाब को फिर से पुनर्जीवित करने के लिए किसान, नौजवान और बुद्धिजीवियों का सहयोग आवश्यक है। कौशलेन्द्र कुमार ने इस शुंगकालीन तालाब को आस्था का तालाब बताते हुए कहा कि इसका संबंध हिंदू और बौद्ध धर्मावलंबियों से भी जुड़ा है। उन्होंने कहा अभी से लोग चेत जाएं। वर्ना तीसरा विश्व युद्ध पानी के लिए होने वाला है। उन्होंने कहा इलाके में होने वाले सभी प्रकार के अनुष्ठानों में इस तालाब जल का इस्तेमाल होता है। परन्तु इस तालाब की हालत अच्छा नहीं है। इसके गाद को हटाने और अतिक्रमण मुक्त करने में प्रशासन को सहयोग करने के लिए ग्रामीणों को आगे आना चाहिए । उन्होंने कहा कि ग्रामीण ठान लेंगे तो देखते- देखते यह तालाब पुरानी अस्तित्व में आ सकता है । जिले में पहले बहुत तालाब, आहर, पइन आदि पारंपरिक जल स्रोत थे, जिस पर अतिक्रमण किया गया है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के द्वारा जल स्रोतों पर अतिक्रमण किया गया है। वे स्वेच्छा से छोड़ दें। इसी में उनकी भलाई है। वर्ना सरकार किसी को छोड़ने नहीं जा रही है। उन्होंने कहा कि पर्याप्त जल रहेंगे तभी बिजली भी बनेंगे और सिंचाई भी होगी। उन्होंने कहा कि प्रदूषण मुक्त पर्यावरण के लिए बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण की जरूरत है। वृक्षों को बचाने के लिए पानी की जरूरत है। उन्होंने तालाबों, आहरो, नदियों के तट पर और अलंग पर पौधारोपण करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि इसी महीने की 6 तारीख को जल पुरुष राजेंद्र सिंह इस तालाब को देखने के लिए आए थे। इसकी दशा सुधारने के लिए तथा पुनर्जीवित करने के लिए उन्होंने फावड़ा भी चलाया था। सांसद ने कहा कि ग्रामीण अपनी मेहनत से इस तालाब को फिर से पुनर्जीवित करें। इस तालाब के जीर्णोद्धार में हरसंभव सहयोग करने का भी उन्होंने आश्वासन दिया। नव नालंदा महाविहार डीम्ड विश्वविद्यालय के डीन अकैडमीक डॉ श्रीकांत सिंह ने कहा कि पानी की बर्बादी को हर हाल में रोकना होगा। उन्होंने पानी के व्यवसायीकरण पर रोक लगाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि वाटर पार्क के द्वारा बड़े पैमाने पर पानी की बर्बादी हो रही है। इसलिए सरकार को इस पर विचार करना चाहिए। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर स्मृति न्यास के अध्यक्ष नीरज कुमार ने नालंदा को फिर से पानीदार समाज बनाने के लिए किसान, नौजवान और बुद्धिजीवियों को बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नालंदा में पहले बड़ी संख्या में जलाशय हुआ करता था। तब कभी जल संकट नहीं होते थे। गांव – गांव में पहले तालाब, आहर, और पइन हुआ करता था। जिससे किसान खेतों की सिंचाई तो करते ही थे। गांवों में पीने के पानी की कमी नहीं होती थी। जब से पारंपरिक जल स्रोतों की समाज और सरकार से अनदेखी होने लगी तभी से अतिक्रमण भी होने लगा। इसके साथ ही जल संकट भी गांव में बढ़ने लगी। उन्होंने कहा पानी के संकट से बचने के लिए पारंपरिक जल स्रोतों को बचाना और पुनर्जीवित करना बहुत जरूरी है। इस अवसर पर सिलाव बीडीओ डॉ अंजनी कुमार ने जल संरक्षण अभियान की चर्चा करते हुए कहा कि प्रखंड के सभी पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए सरकारी प्रयास और पहल जारी है। चंडी मौ के तालाब को पुनर्जीवित करने के लिए उन्होंने हर संभव सहयोग देने का आश्वासन दिया।
थानाध्यक्ष मनोज कुमार ने कहा कि इस तालाब के जीर्णोद्धार और अतिक्रमण मुक्त कराने में उनका हर संभव सहयोग रहेगा। जिला परिषद सदस्य सत्येंद्र पासवान ने जल स्रोतों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जल ही जीवन है। जल है तो कल है। इस अवसर पर प्रकृति सचिव राम विलास, भाजपा जिला उपाध्यक्ष जनार्दन सिंह, शिक्षाविद डॉ गोपाल शरण सिंह, मुखिया प्रतिनिधि उमेश प्रसाद एवं अन्य ने विचार व्यक्त किया।

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