….तुम तो ठहरे परदेसी महागठबंधन धर्म क्या निभाओगे,सीटों के बंटवारे में एक दिन में बिखर जाओगे… महागठबंधन में टूट की आहट

बिहार राजनीति
जनादेश न्यूज़ बिहार
पटना : बिहार की राजनीति में सहज अंदाजा लगाना उड़ती चिड़िया के पैरों में हल्दी लगाने के बराबर है. सत्ता सुख के लिए कब कौन किसके पल्लू में चला जाएगा यह कहना बड़ा ही मुश्किल है. क्योंकि बिहार की सियासत को परख पाना इतना आसान नहीं है जितना लोग आसान समझ पाते हैं. कभी एक साथ एक नेतृत्व में चुनाव लड़ने वाले बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और बिहार के पूर्व सजायाफ्ता मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बीच आज फिर उतनी ही दूरी बन गई जितना दोनों में महागठबंधन होने के पहले था. इधर लालू प्रसाद के महागठबंधन में बीजेपी से अलग होकर उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी भी शामिल हुए.
2019 के चिलचिलाती धूप में लोकसभा चुनाव का जोर शोर से प्रचार प्रसार किया गया चुनाव परिणाम आने के बाद महागठबंधन को मुंह की खानी पड़ी और सबसे बेहतर पार्टी के रूप में महागठबंधन में कांग्रेस ही किशनगंज सीट जीतकर अपना साख बचा पाई. लेकिन एक बार फिर उपचुनाव को लेकर नेतृत्व और सीएम पद को लेकर पहले से उलझे महागठबंधन का पेंच और उलझता जा रहा है। उलझन इस हद तक है कि 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले हीं टूट की आहट सुनायी देने लगी है। मामला उपचुनाव से जुड़ा हुआ है। बिहार में 5 विधानसभा सीटों और 1 लोकसभा सीटों पर उपचुनाव होने जा रहा है। तीन विधानसभा सीटों नाथनगर, बेलहर और सिमरी बख्तियारपुर में राजद ने अपने प्रत्याशी पहले उतार दिया है और खबर है कि चैथे सीट पर भी राजद अपने प्रत्याशी को उतारेगी। स्पष्ट है कि उपचुनाव में किशंनगंज सीट के अलावे आरजेडी ने अपने सहयोगियों के लिए कोई और सीट नहीं छोड़ी है।

किशनगंज कांग्रेस की पारम्परिक सीट है इसलिए संभवतः कांग्रेस के लिए यह सीट छोड़ी गयी है। दरौंदा सीट के लिए आरजेडी अपने प्रत्याशी के नाम की घोषणा आज शाम कर सकती है ऐसी खबर सामने आ रही है। सीटों के इस गणित से कई बातें साफ हो गयी है। पहली बात तो यह कि ‘हम’, रालोसपा और वीआईपी पार्टी के हिस्से कुछ नहीं आया है। कांग्रेस की अपेक्षा के अनुरूप भी हिस्सेदारी नहीं मिली है। नाथनगर, किशनगंज और सिमरी बख्तियारपुर सीट पर कांग्रेस पहले हीं अपनी दावेदारी जताती रही है। लेकिन कांग्रेस के हिस्से सिर्फ किशनगंज की सीट आती दिख रही है।