Featured Video Play Icon

नालंदा में महागठबंधन के हम प्रत्याशी अशोक कुमार आजाद को मुश्किल ही नहीं नामुमकिन होगा एनडीए के जदयू प्रत्याशी कौशलेंद्र कुमार को चित करना

नालंदा राजनीति
जनादेश न्यूज़ नालंदा
👉कभी कांग्रेस और वामपंथ की रही थी पैठ लेकिन अब बज रहा है समाजवाद का डंका
बिहारशरीफ (राजीव रंजन,9801595018) :विश्व विख्यात विश्व गुरु नालंदा जो प्राचीन काल से ही ना ही केवल ज्ञान की धरती रही बल्कि राजनीति की भी भूमि रही है यह नालंदा. नालंदा संसदीय क्षेत्र का कार्यक्षेत्र पूरा नालंदा जिला आता है और यहां सातवें चरण एवं अंतिम चरण में 19 मई को मतदान होना है अब चुनाव के बाद 6 दिन बचे हैं. इसके साथ मतदाताओं का ध्रुवीकरण हो रहा है. खासकर नालंदा की राजनीति लगभग पिछले तीन दशक से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इर्द गिर्द घूमता रहा है नालंदा एक ही धुरी नीतीश कुमार पर घूम रहा है. भले ही नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बाद में बनी हो लेकिन 1985 में नालंदा से विधायक चुने गए थे और इसी के साथ उनकी राजनीतिक हैसियत नालंदा जिले में बढ़ने लगी थी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जब बार संसदीय क्षेत्र से सांसद बने तब नालंदा जिले पर उनकी पकड़ और मजबूत हो गई.
इसके बाद तो स्थिति यह हो गई कि भले ही देश में जो भी बहार हो लेकिन नालंदा में चाहे लोकसभा का चुनाव हो या विधानसभा का चुनाव रिजल्ट तो नीतीश कुमार ही होते हैं. ऐसा माना जाता है कि नालंदा में सियासत का मतलब ही होता है नीतीश कुमार जिसके सर पर हाथ रख दिया उसका बेड़ा पार इन्हीं के नाम पर राजनीतिक हस्ती अपनी नैया को पार करते हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव में जब पूरे देश में मोदी लहर थी और बिहार में इससे अछूता नहीं रहा था फिर भी नीतीश कुमार एनडीए से अलग होकर अकेले चुनाव मैदान में रहे बावजूद तमाम परिस्थितियों के इन्होंने नालंदा सीट पर जदयू का झंडा लहराया. जबसे नीतीश कुमार ने जनता और समता पार्टी जैसे दलों को खड़ा किया तब से इस सीट पर लगातार उनके दल के प्रत्याशी नालंदा से चुनाव जीतते रहे हैं. लगातार सात चुनावों में इस सीट पर समता पार्टी और जेडीयू चुनाव जीती है यह भी सच है कि संसदीय क्षेत्र में नीतीश को मात देने के लिए विरोधी दलों ने लगातार प्रयास किया हर चुनाव में कोई न कोई नया समीकरण और कोई नया फार्मूला अपनाया गया लेकिन हर एक बार विपक्ष को यहां से हार का ही सामना करना पड़ा और जीत की डंका विपक्ष की कभी नहीं बजी. और नालंदा में अंततः वही हुआ जो नीतीश कुमार ने चाहा. चाहे देश में मोदी लहर हो या फिर कोई और समीकरण ऐसे में इस बार के संसदीय चुनाव पर भी प्रदेश की नजरें टिकी हुई है.लोग यह जानना चाह रहे हैं कि सीट का चुनाव परिणाम क्या होता है कारण यह है कि विपक्ष ने एक बार फिर इस सीट पर नीतीश कुमार को घेरने के लिए अलग समीकरण से जाल बिछाया है अब देखना यह दिलचस्प होगा कि विपक्ष कहां तक कामयाब होती है या फिर नीतीश कुमार की चाल के आगे चारों खाने चित होती है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *