सब कुछ ठीक-ठाक है बरबीघा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सह रेफरल अस्पताल का, डॉ. फैसल अरशद की कार्यशैलियों से काफी खुश हैं मरीज

विविध शेखपुरा
जनादेश न्यूज़ शेखपुरा
बरबीघा : एक दैनिक अखबार में छपी खबर
“एमबीबीएस डॉक्टर रहते हैं क्लीनिक पर आयुष डॉक्टर के भरोसे रेफरल अस्पताल”
की हेडिंग से एक खबर प्रकाशित की गई जिसमें मरीजों की परेशानियों का वर्णन किया गया है कि बरबीघा रेफरल अस्पताल में दो प्रभारी चिकित्सक रहने के कारण गुटबाजी चरम सीमा पर पहुंच गई है और गुटबाजी के कारण मरीजों को समुचित इलाज नहीं हो रहा है.
लेकिन हकीकत तो कुछ और है बरबीघा रेफरल अस्पताल में इलाज कराने के लिए आने वाले मरीज बताते हैं कि बरबीघा रेफरल अस्पताल का तस्वीर और तकदीर पहले से बहुत कुछ बदल गया है. मरीज बताते हैं कि पहले से अब उन्हें बेहतर इलाज यहां मिलता है. मरीजों का कहना है कि जब से बरबीघा रेफरल अस्पताल में प्रशासनिक चिकित्सा पदाधिकारी के रूप में डॉ फैसल अरशद ने जिम्मेवारी संभाली है तो यहां की विधि व्यवस्था सुचारू ढंग से संचालित हो रही है और मरीजों को बेहतर इलाज किया जा रहा है.लेकिन इनकी कर्तव्यनिष्ठा और कार्यशैली शायद अस्पताल के कुछ कर्मचारियों को ही बेहतर नहीं लगता है क्योंकि उनके द्वारा कर्मचारियों को बेहतर कार्य करने के कड़े निर्देश दिए जाते हैं. लेकिन सवाल उठता है कि आखिर किस टारगेट के कारन बरबीघा रेफरल अस्पताल के डॉक्टरों को परेशान करने में आखिर जुट गए हैं स्थानीय संवाददाता उमेश. मामले की जानकारी देते हुए आपको बता दूं कि बुधवार को शेखपुरा जिले के जयरामपुर थाना क्षेत्र के कल्याणपुर गांव में दो गुटों में मारपीट हुई जो इलाज के लिए बरबीघा रेफरल अस्पताल पहुंचे डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज कर बेड उपलब्ध करा दिया.
कंपाउंडर बार-बार उन्हें जाकर उनका हाल चाल लेते रहे गुरुवार की सुबह डॉक्टरों की कमी होने के कारण आयुष चिकित्सक के द्वारा उनकी हालात को बेहतर नहीं देखते हुए घायल मरीजों को बेहतर इलाज के लिए शेखपुरा सदर अस्पताल रेफर किया गया. बावजूद इस मामले को एक दैनिक अखबार में तूल दिया गया इतना ही नहीं खबर में यह भी वर्णन किया गया कि परेशान मरीजों ने गुरुवार की देर रात एसपी आवास का घेराव कर चिकित्सक पर कार्रवाई की गुहार लगाई है. जबकि ऐसा कोई मामला ही नहीं था मरीज के परिजनों ने जयरामपुर थाने में एफ आई आर नहीं होने को लेकर एसपी आवास पहुंचे थे.

जब इन सब मामलों की पड़ताल करने के लिए जनादेश न्यूज़ की टीम ने संबंधित खबर के संवाददाता उमेश से संपर्क स्थापित किया तो उसने सारी बात की जानकारी दी लेकिन उन्हें जानकारी का कुछ अभाव भी है शायद उन्हें यह पता नहीं कि डॉक्टरों के अभाव में आयुष चिकित्सक भी ओपीडी का कार्यभार संभाल सकते हैं. उनकी मंशा किसी खास चिकित्सक को टारगेट करने की है और समाज में उनकी छवि बदनाम करने पर वह तुले हैं. उधर इन सब मामलों की जानकारी लेने के लिए जब प्रशासनिक चिकित्सा पदाधिकारी डॉ फैशाल अरशद से संपर्क स्थापित किया गया तो उन्होंने बताया कि बरबीघा रेफरल अस्पताल का सब कुछ ठीक-ठाक है संबंधित संवाददाता के द्वारा विज्ञापन की मांग की गई थी जो उनके द्वारा नहीं दिया गया और अस्पताल को बदनाम करने के उद्देश्य से कुछ इस तरह की खबर को प्रकाशित की गई है.