चुनाव आयोग ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि केरल के कासरगोड में वोटिंग के अभ्यास के दौरान ‘इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन’ (ईवीएम) में कथित तौर पर एक अतिरिक्त वोट दिखने के आरोप झूठे हैं। आयोग की तरफ से शीर्ष अदालत में पेश हुए वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त नीतेश कुमार ने ईवीएम में गड़बड़ी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, ‘ये खबरें गलत हैं। हमने जिलाधिकारी से आरोपों की पड़ताल की है और यह बात सामने आई है कि ये गलत हैं।’ दरअसल, गुरुवार को असोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की तरफ से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि ऐसी खबरें हैं कि ईवीएम ‘मॉक पोल’ के दौरान एक अतिरिक्त वोट दिखा रही थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के वकील को भूषण के आरोपों को देखने की बात कही। इसी के बाद वरिष्ठ चुनाव अधिकारी ने शीर्ष अदालत में ईवीएम पर अपना पक्ष रखते हुए आरोपों को खारिज किया।
शीर्ष अदालत उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी जिनमें ईवीएम के माध्यम से डाले गए वोट का ‘वोटर वेरिफियेबिल पेपर ऑडिट ट्रेल’ (VVPAT) से पूरी तरह मिलान करने का अनुरोध किया गया था। इस मामले में गुरुवार को सुनवाई पूरी हो गई और सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया है। जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच ने याचिकाओं पर चुनाव आयोग का जवाब सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। याचिकाकर्ताओं ने वीवीपैट मशीनों पर पारदर्शी कांच को अपारदर्शी कांच से बदलने के आयोग के 2017 के फैसले को पलटने की भी मांग की है, जिसके जरिए कोई मतदाता केवल 7 सेकंड के लिए रोशनी चालू होने पर ही पर्ची देख सकता है।
मॉक पोल के दौरान ईवीएम में एक्स्ट्रा वोट के आरोपों को लेकर सुनवाई के दौरान वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त नीतेश कुमार व्यास ने जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच से कहा, ‘ये खबरें गलत हैं। हमने डीएम से आरोपों की पड़ताल की है और यह बात सामने आई है कि ये गलत हैं। हम अदालत में विस्तृत रिपोर्ट जमा करेंगे।’ व्यास शीर्ष अदालत में यह बताने के लिए पेश हुए कि आखिर ईवीएम कैसे काम करती है। इससे पहले दिन में शीर्ष अदालत ने निर्वाचन आयोग की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह से इस मुद्दे पर विचार करने को कहा था। वकील प्रशांत भूषण ने इस मुद्दे को उठाया था।