अनंतनाग आतंकी हमले में घायल फरहा जयपुर शिफ्ट, पति तबरेज का चेन्नई में इलाज, कंधे को चीरते हुए निकल गई थी गोली

पांच दिन पहले कश्मीर के अनंतनाग में हुए आतंकी हमले में घायल जयपुर की फरहा अब अपने घर लौट आई हैं। जम्मू स्थित मेडिकल कॉलेज में इलाज के बाद फरहा और जयपुर शिफ्ट कर दिया गया था। गुरुवार 23 मई की दोपहर को फरहा और उनके परिवार के सदस्यों को एयरलिफ्ट किया गया। जयपुर पहुंचने के बाद एसएमएस के ट्रोमा हॉस्पिटल में लाया गया। वहां पर एक्स-रे और सिटी स्कैन सहित अन्य जांचें हुई। फरहा के कंधे में गोली लगी थी, जिससे हड्डी टूट गई थी। ट्रोमा सेंटर में ड्रेसिंग करने के बाद नया प्लास्टर किया गया।

एसएमएस ट्रोमा सेंटर में ड्रेसिंग कराने के दौरान डॉक्टर फरहा को भर्ती होने के लिए कहा, लेकिन फरहा ने कहा कि उनके बच्चे छोटे हैं। ऐसे में भर्ती होने के बजाय घर रहकर इलाज लेना चाहती हैं। डॉक्टरों ने फरहा की बात को मान लिया और उन्हें घर भेज दिया। चूंकि पिछले चार दिन से वे जम्मू के मेडिकल कॉलेज के हॉस्पिटल में भर्ती थी और वहां इलाज करवा रही थीं। चार दिन से इलाज में फरहा की हालत में काफी सुधार आया है। अब उन्हें घर पर ही सभी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। डॉक्टरों ने फरहा को 10 दिन बाद वापस हॉस्पिटल आने के लिए कहा है।

जयपुर के ब्रह्मपुरी निवासी तबरेज, उनकी पत्नी फरहा, दोनों बच्चों के साथ तबरेज के बड़े भाई, फरहा के भाई सहित परिवार के कुछ और सदस्य भी साथ में ही घूमने गए थे। 18 मई को हुए आतंकी हमले के दौरान फरहा और तबरेज सहित सभी लोग होटल में खाना खाने गए थे। अधिकतर लोग होटल में प्रवेश कर चुके थे। फरहा, उनके पति तबरेज और उनका बेटा होटल में प्रवेश कर रहे थे। इसी दौरान आतंकियों ने ताबड़तोड़ गोलियां चलाई थी। इस हमले में तबरेज और फरहा को गोलियां लगी, जबकि उनका बच्चा डर के मारे कुर्सियों के नीचे छिप गया था। फरहा के इलाज के दौरान परिवार के सदस्य भी वहीं ठहरे हुए थे। अब सभी सदस्य जयपुर लौट आए हैं।

आतंकी हमले में घायल हुई फरहा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और विधायक बाल मुकुंद आचार्य से गुहार लगाई है कि वे उनके पति के लिए आंखें डोनेट कराने का इंतजाम करें। जयपुर के एसएमएस ट्रोमा सेंटर में मीडिया से बात करते हुए फरहा ने कहा कि वे चाहती है कि उनके पति फिर पहले की तरह इस दुनिया को देखे। इसके लिए उनके लिए आंखें डोनेट करने की व्यवस्था होनी चाहिए। दो नहीं तो कम से कम एक आंख का इंतजाम होना चाहिए, ताकि वे पहले की तरह हमें और अपने परिवार को देख सके।

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