मैं ईवीएम हूं… खुश हूं, इस बार मुझ पर ‘लांछन’ नहीं लगामैं ईवीएम हूं।

मैं ईवीएम हूं… खुश हूं, इस बार मुझ पर ‘लांछन’ नहीं लगामैं ईवीएम हूं। लोकसभा की 543 सीटों पर इस बार चुनाव हुआ। लेकिन, मुझ पर सवाल नहीं उठाया गया। मैं आज काफी खुश हूं। मुझ पर कोई सवाल नहीं उठाया जा रहा है। पिछले कुछ चुनावों में जिस प्रकार से मुझ पर सवाल उठाया गया, उसने मुझे काफी परेशान किया। मैं हर बार अग्निपरीक्षा से गुजरी। लेकिन, चुनावी मैदान में हार का ठीकरा मुझ पर पर फोड़ा जाता रहा। विपक्षी दलों ने इस बार जमीन पर अपने पक्ष में प्रचार किया। कामों को गिनाया। सफलता मिली। वे मुझे भूल गए। यही तो मैं चाहती हूं। लोकतंत्र में लोगों के हाथ में तंत्र की चाबी होती है, लेकिन मुझ पर आरोप लगाकर विपक्षी दल अपनी हार का आकलन ही नहीं करते थे। चुनाव दर चुनाव यही स्थिति बनती रही।मैं ईवीएम हूं… खुश हूं, इस बार मुझ पर ‘लांछन’ नहीं लगा

यूपी- उत्तराखंड चुनाव के बाद भी मेरे ऊपर लांछन लगाए गए। विपक्षी दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मुझ पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने तो कहा कि मुझे सत्ताधारी दल अपने हिसाब से उपयोग कर रहा है। इस प्रकार के बयानों ने मुझे हमेशा दुखी किया। सबसे बड़ा दुख तो तब हुआ जब मेरे ऊपर सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगा दी गई। सुप्रीम कोर्ट में मेरी उपयोगिता पर बहस हुई। वकीलों ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष मेरा उपयोग सरकार बनाने के लिए करता रहा है। कैसे? सवाल का जवाब नहीं मिला।

मैं सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद करती हूं, जिसने हमारे पक्ष को समझा। सुप्रीम कोर्ट ने तकनीक के जमाने में वापस बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाने की मांग पर सवाल उठाया। फिर से चुनाव को पुराने दौर में न ले जाने की की बात कही। सुप्रीम कोर्ट ने मेरी प्रतिष्ठा को स्थापित किया। वहीं, देश के सबसे बड़े चुनाव में मुझ पर कोई सवाल नहीं उठ रहा है। यह मेरे लिए सबसे अधिक प्रसन्नता की बात है। लोकसभा चुनाव का रिजल्ट ने मुझे मुस्कुराने का मौका दिया है। अब मैं बदनाम नहीं हूं। मेरी विश्वसनीयता फिर से बरकरार हो गई है।

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