जयपुर: भजनलाल सरकार के पहले फुल बजट में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़ा ऐलान किया गया है। बतौर वित्त मंत्री डिप्टी सीएम दिया कुमारी ने बजट पेश करते हुए कहा कि प्रदेश में चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार करते हुए इस वित्तीय वर्ष के बजट में कुल 27660 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रावधान रखा गया है। यह पूरे बजट का 8.26 फीसदी हिस्सा है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना को ऐतिहासिक योजना के रूप में प्रचारित किया गया था जिसमें 25 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज दिए जाने के प्रावधान किए गए थे। प्रदेश में सरकार बदलने के बाद चिरंजीवी योजना का नाम बदलकर मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना कर दिया गया। इसके प्रावधानों में भी जरूरी बदलाव किए गए।
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान चिरंजीवी योजना में पहले पांच लाख, फिर दस लाख और बाद में 25 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज किए जाने के प्रावधान किए गए थे। पूर्व सीएम अशोक गहलोत चिरंजीवी योजना को देश की नंबर वन योजना बता रहे थे। भाजपा ने इस योजना को सीरे से नकार दिया था। इस योजना में कई तरह की खामिया बताई गई थी। चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह यहां तक कह चुके हैं कि 25 लाख रुपए के मुफ्त इलाज का सिर्फ दावा था। हकीकत में प्रदेश के एक भी मरीज को 25 लाख रुपए का इलाज नहीं मिला। आंकड़ों को देखें तो सर्वाधिक साढ़े 13 लाख रुपए का इलाज सिर्फ एक मरीज का किया गया। करीब चार या पांच मरीज ऐसे हैं जिन्हें पांच से सात लाख रुपए का इलाज लिया। शेष सभी इलाज दो से तीन लाख रुपए से कम ही रहे। ऐसे में 25 लाख रुपए का मुफ्त इलाज केवल दिखावा था। राज्य के निजी अस्पतालों के डॉक्टरों की राजस्थान डॉक्टर्स एसोसिएशन ने तो इसे सदी की सबसे अव्यवहारिक, अलोकतांत्रिक और असफल योजना योजना करार दिया था।