Russia Ukraine War: दुनिया इस वक्त बारूद के ऐसे ढेर पर बैठी है, जहां एक तरफ पश्चिम एशिया में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच भीषण जंग का 11वां दिन है, तो दूसरी तरफ यूरोप में रूस-यूक्रेन युद्ध अपने पांचवें साल में प्रवेश कर चुका है. तेहरान और यरूशलेम के बीच मिसाइलों के आदान-प्रदान के शोर में जैसे यूक्रेन से आ रही चीखें कहीं दब सी गई हैं, लेकिन हकीकत यह है कि 24 फरवरी 2022 से शुरू हुई रूस-यूक्रेन जंग ने अब तक इतने घाव दिए हैं कि द्वितीय विश्व युद्ध की यादें ताजा हो गई हैं. लाखों की मौत और करोड़ों के विस्थापन के बीच यह संघर्ष अब केवल दो देशों की नहीं, बल्कि मानवता की हार बन चुका है.
रूस-यूक्रेन युद्ध और मौतों का डरावना सच
रूस और यूक्रेन के बीच जारी खूनी संघर्ष को चार साल पूरे हो चुके हैं. इस दौरान मौतों का जो आंकड़ा सामने आया है, वह रूह कंपा देने वाला है. हालांकि युद्ध के मैदान में सटीक संख्या बताना मुश्किल होता है, क्योंकि दोनों ही देश अपनी सैन्य क्षति को छिपाते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के अनुमान डराने वाले हैं. कुछ वक्त पहले सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) ने बताया था कि, 2022 से अब तक लगभग 3,25,000 रूसी सैनिक मारे जा चुके हैं. वहीं, यूक्रेन की ओर से यह आंकड़ा 1,00,000 से 1,40,000 के बीच होने का अनुमान है, जबकि अधिकारिक तौर पर राष्ट्रपति जेलेंस्की ने केवल 55,000 मौतों की पुष्टि की है.
आम नागरिकों की तबाही और बर्बाद होते शहर
सैनिकों के साथ-साथ इस युद्ध ने आम जनता को भी नहीं बख्शा है. संयुक्त राष्ट्र ने अब तक यूक्रेन में 15,000 से ज्यादा आम नागरिकों की मौत की पुष्टि की है. असली संख्या इससे कई गुना ज्यादा हो सकती है क्योंकि मारीउपोल जैसे रूसी कब्जे वाले इलाकों का कोई सटीक डेटा बाहर नहीं आ पा रहा है. दूसरी ओर, यूक्रेन के जवाबी हमलों में रूस के सीमावर्ती इलाकों में भी सैकड़ों नागरिकों ने अपनी जान गंवाई है. पूर्वी और दक्षिणी यूक्रेन के बाखमुत और तोरेत्स्क जैसे कई शहर आज केवल खंडहरों के रूप में नक्शे पर मौजूद हैं.