भगवंत मान के बाद अब गुजरात में सुनीता केजरीवाल लेंगी एंट्री, AAP ने भरूच में चला ‘रिवरफ्रंट’ का दांव

 गुजरात में क्षत्रिय आंदोलन के चलते भले ही सौराष्ट्र की राजकोट सीट सुर्खियों में है, लेकिन में सबसे ज्यादा कड़ा मुकाबला कांग्रेस नेता अहमद पटेल से जुड़ी रही भरूच लोकसभा सीट पर होने की संभावना जताई जा रही है। आम आदमी पार्टी ने बीजेपी के इस अभेद्य गढ़ को भेदने के लिए चैतर वसावा पर बड़ा दांव खेला है। चैतर वसावा भरूच में बड़े शक्ति प्रदर्शन के बाद 18 अप्रैल को अपना नामांकन दाखिल किया। भरूच में हुए शक्ति प्रदर्शन में भारी भीड़ उमड़ी थी। इसमें पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी पहुंचे थे। भरूच लोकसभा से चैतर वसावा के नामांकन के बाद पार्टी अब चुनाव प्रचार के लिए संजय सिंह, गोपाल राय जैसे नेताओं के प्रोगाम की तैयारी कर रही है तो वहीं तरफ सुनीता केजरीवाल के भी गुजरात में प्रचार करने की संभावना है। पार्टी ने गुजरात के लिए घोषित स्टार प्रचारकों की सूची में उनका नाम दूसरे नंबर पर रखा है।

भरूच से आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार चैतर वसावा ने बीजेपी के खिलाफ क्षेत्र के पिछड़ेपन का मुद्दा उठाते हुए रिवरफ्रंट का दांव खेला है। चैतर वसावा ने वादा किया है कि अगर वे जीते तो वह भरूच को महानगरपालिका के साथ नर्मदा नदी पर रिवरफ्रंट बनाने की काम में जुटेंगे। चैतर वसावा का इस सीट पर मुकाबला बीजेपी के मनसुख वसावा से हैं। मनसुख वसावा 1998 में पहली बार चुनाव जीते थे। वे इसके बाद से लगातार सांसद हैं और छह बार जीत हासिल कर चुके हैं। चैतर वसावा भरूच लोकसभा सीट में आने वाली डेडियापाडा विधानसभा सीट से विधायक है। हाल ही में उन्हें हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। निचली कोर्ट ने मामले में जमानत देते उनके नर्मदा जिले में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी थी। हाई कोर्ट ने वसावा को 12 जून तक के लिए राहत प्रदान की है।

2022 गुजरात विधानसभा चुनावों में चैतर वसावा ने डेडियापाडा सीट से बड़ी जीत दर्ज की थी। उन्होंने 40 हजार वोटों से बीजेपी को हराया था। तब उनकी दोनों पत्नियों ने काफी प्रचार किया था। इस के चुनाव में भी वे खूब जोरों से प्रचार कर रही हैं। गर्मी के साथ चुनाव प्रचार का पारा चढ़ने के बाद अब आप आदमी पार्टी के उम्मीदवार चैतर वसावा विकास के मुद्दे पर मनसुख वसावा को घेर रहे हैं। वसावा ने आरोप लगाया है कि मनसुख वसावा इतने लंबे समय से सांसद हैं लेकिन वह क्षेत्र का विकास नहीं करवा पाए हैं। वे अपनी सांसद निधि भी खर्च नहीं कर पाते हैं।

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