उत्तर प्रदेश के बदायूं निवासी बनवारी लाल वर्मा उर्फ बी.एल. वर्मा (BL Verma) को केंद्र में तीसरी बार बनी भाजपा (NDA) सरकार में दूसरी बार केंद्रीय मंत्री बनाया गया है। अब इसको लेकर जिले की जनता के बीच तरह-तरह की चर्चाओं की शुरुआत हो गई है। बदायूं की जनता के बीच सबसे ज्यादा चर्चा यह है कि बीएल वर्मा बिना जनाधार के नेता है। और दो दफा केंद्रीय मंत्री बनाना भाजपा नेतृत्व की कार्य कुशलता पर भी प्रश्न चिन्ह लगा रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में तमाम भाजपा के बदायूं दौरे के बाद यहां भाजपा चारों कोने चित हो गई। ऐसे में जहां हार की समीक्षा चल रही है और बदायूं भाजपा पदाधिकारियों पर सवाल खड़े हो रहे वही एक बार फिर से बीएल वर्मा का केंद्रीय मंत्री बनना जनता के समझ से परे नजर आ रहा है।
बीएल वर्मा को लेकर कहा जाता है कि आज तक कभी कोई चुनाव नहीं लड़े। हालांकि वो RSS से 1979 से जुड़े रहे है। लेकिन भाजपा के एक पदाधिकारी ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि बीएल वर्मा संगठन में सिर्फ पद तक ही सीमित रहें है। किसी चुनाव में उनकी भागीदारी मात्र सभाओं और बैठकों में उपस्थिति दर्ज कराने तक ही निपट जाती है। पब्लिक के बीच उनकी पहचान नगण्य है। चर्चा है कि लोधे राजपूत बिरादरी को संतुष्ट करने के लिए जनता से जुड़े और भी नेता है। फिर हर बार बीएल वर्मा पर ही शीर्ष नेतृत्व की नजरे इनायत क्यों होती है।
बीएल वर्मा की राजनीतिक सफरनामा की बात की जाए तो वो साल 1979 में RSS से जुड़े। 1980 में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की और यहां से वो जिला कमेटी के सदस्य बने। 1984 में भाजपा जिला युवा कमेटी के महामंत्री बनाए गए। और 1990 में उन्हें प्रदेश महामंत्री की सौगात दी गई। 1996 में भाजपा प्रदेश युवा मोर्चा के प्रदेश मंत्री का दायित्व दिया गया।
वहीं 2003 और 2006 में वो प्रदेश अध्यक्ष केसरी नाथ त्रिपाठी की टीम प्रदेश मंत्री के पद पर रहे। जिसके बाद 2009 में कल्याण सिंह भाजपा से अलग हुए तो बीएल वर्मा उनके साथ चले गए। पूर्व सीएम रहे कल्याण की जन क्रांति पार्टी में वर्ष 2009 से 2012 तक वो प्रदेश अध्यक्ष रहे। चूंकि 2013 में जन क्रांति पार्टी का भाजपा में विलय हो गया और वर्मा भाजपा रूहेलखंड के क्षेत्रिय अध्यक्ष बनाए गए। 2018 में प्रदेश उपाध्यक्ष और सिडको के चेयरमैन के दर्जा राज्य मंत्री बना दिए गए। 2019 में पार्टी में क्षेत्रिय संगठन मंत्री पद का दायित्व संभाला। हालांकि 2020 में पार्टी ने राज्य सभा सासंद बनाया। मार्च 2021 में पार्टी ने भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बना दिया।
बदायूं 2024 लोकसभा चुनाव भाजपा बुरी तरह हार गई है। यहां इस लोकसभा चुनाव के दौरान मोदी,अमित शाह,उत्तराखंड और राजस्थान के सीएम के भाजपा की जीत के लिए दौरे हुए। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का तो यहां तीन बार चुनाव से पहले आना हुआ यह ही नही भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और दोनों डिप्टी सीएम ने भी भाजपा उम्मीदवार की जीत के लिए का विगुल फूंका। लेकिन हॉट सीट कहे जाने वाली सपा के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल यादव के बेटे आदित्य यादव से भाजपा लोकसभा चुनाव हार गई।
ऐसे में चर्चा है कि बीएल वर्मा पिछली बार भी मोदी सरकार में मंत्री रहे। भाजपा के तमाम स्थानीय पदाधिकारी भाजपा को अपने पक्ष में करने के लिए नाकामयाब ही साबित रहे। मसलन यह कि कहीं ना कहीं धरातल पर सब कुछ ठीक नही था इसलिए ही जनता ने इस बार भाजपा को नकार दिया। हालांकि भाजपा हारी हुई सीट पर चिंतन और मंथन जरूर कर रही है। लेकिन इस बीच चर्चा यह है कि शिवपाल यादव के बेटे आदित्य के मुकाबले यहां एक भाजपा के दमदार नेता की जरूरत है। जो जनता के बीच रहकर मोदी सरकार तक उनकी समस्याओं का हल कराने का प्रयास मजबूती से कर सके।