दोधारी तलवार हैं मुइज्जू, इधर दिल्ली में कर रहे थे गलबहियां, उधर मालदीव में करवा दिया भारत विरोधी गेम

 मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू भारत में मोदी के शपथ ग्रहण में शामिल होने के लिए आए और नए कार्यकाल में भारत और मालदीव के साथ रिश्ते सुधरने की उम्मीद जता रहे थे। पीएम मोदी से भी उनकी बातचीत हुई और सोमवार केंद्रीय मंत्री एस जयशंकर ने मुइज्जू के साथ मीटिंग की। जब मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू भारत में थे और घनिष्ठ और ऐतिहासिक संबंधों को बढ़ाने की बात कर रहे थे उसी समय उनके देश में एक संसदीय समिति ने तीन समझौतों की समीक्षा की घोषणा कर दी। इस समझौते पर मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति और भारत समर्थक नेता इब्राहिम सोलिह ने भारत के साथ हस्ताक्षर किए थे। अब इस समीक्षा के पीछे यह कहा जा रहा है कि इनमें कथित तौर पर मालदीव की संप्रभुता का उल्लंघन किया गया था। इतना ही नहीं मोदी के शपथ ग्रहण का लाइव प्रसारण भी वहां रोक दिया गया।

मालदीव की स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सांसद अहमद अजान ने कहा कि संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा सेवा समिति ने सोलिह के प्रशासन द्वारा मालदीव की संप्रभुता और स्वतंत्रता को कमजोर करने वाली कार्रवाइयों की जांच के लिए एक संसदीय जांच करने का फैसला किया है। अजान ने संसदीय जांच शुरू करने का प्रस्ताव रखा और आरोप लगाया कि पिछली सरकार के कार्यों ने देश की स्वतंत्रता और संप्रभुता को प्रभावित किया है। मुइज्जू की सरकार ने पिछले साल घोषणा की थी कि वह मालदीव के जलक्षेत्र में संयुक्त हाइड्रोग्राफिक सर्वे के लिए भारतीय नौसेना के साथ समझौते को रिन्यू नहीं करने जा रही है।

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू भले ही भारत में थे लेकिन मालदीव में वहां की सरकार की नफरत भारत के खिलाफ कम होती नहीं दिख रही है। मुइज्जू भारत मोदी के शपथ ग्रहण में शामिल होने के लिए भारत आए थे। शपथ ग्रहण में आने से पहले मुइज्जू की ओर से कहा गया कि नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण में शामिल होना उनके लिए सम्मान की बात होगी। मोदी सरकार के नए कार्यकाल में भारत और मालदीव के बीच रिश्ते सुधरने की उम्मीद है। एक ओर रिश्ते सुधरने की बात कही जा रही थी तो वहीं दूसरी ओर मालदीव के सरकारी प्रसारक पब्लिक सर्विस मीडिया ने मोदी के शपथ ग्रहण समारोह का लाइव प्रसारण आखिरी वक्त में रद्द कर दिया।

पिछले साल 17 नवंबर को मालदीव का राष्ट्रपति बनने के बाद मुइज्जू की यह पहली भारत यात्रा थी। मुइज्जु का रुख चीन समर्थक है। उनके मालदीव के राष्ट्रपति पद पर आसीन होने के बाद से भारत और मालदीव के संबंधों में भारी तनाव पैदा हो गया था। उन्होंने शपथ लेने के कुछ ही घंटों बाद अपने देश से भारतीय सैन्यकर्मियों को वापस बुलाए जाने की मांग की थी। इस महीने की शुरुआत में भारतीय सैन्यकर्मियों की जगह आम नागरिकों को तैनात किया गया था। शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए मुइज्जू को दिया गया निमंत्रण और फिर दिल्ली आना भारत और मालदीव के बीच हाल के तनावपूर्ण संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा था। लेकिन ऐसा लगता है कि तनावपूर्ण संबंध जल्द पूरी तरह ठीक नहीं होंगे।

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