मनु भाकर और सरबजोत सिंह की जोड़ी ने रचा इतिहास, भारत ने जीता एक और ब्रॉन्ज मेडल

भारत के स्टार शूटर मनु भाकर और सरबजोत सिंह ने पेरिस में खेले जा रहे ओलंपिक 2024 में इतिहास रचने का काम किया। मनु भाकर और स​रबजोत सिंह की जोड़ी ने भारत के लिए एक और मेडल जीतने का काम किया है। अब भारत के इस ओलंपिक में कुल मिलाकर दो मेडल हो गए हैं। भारत के नाम अब तक चौथे दिन दो मेडल हो चुके हैं। 10 मीटर एयर पिस्टल के मुकाबले में भारत ने साउथ कोरिया पर जीत दर्ज की है। इतना ही नहीं भारत इस जीत के साथ ही मेडल टैली में अब 25वें नंबर पर आ गया है। इससे पहले भारत 26 स्थान पर था, यानी एक स्थान छलांग मारी गई है।  पेरिस ओलंपिक 2024 के चौथे दिन भारतीय दल ने एक और मेडल अपने नाम करने में कामयाबी हासिल की है। इतना ही नहीं, भारत की शानदार शूटर मनु भाकर ने तो इतिहास रचने का काम किया है। आजाद भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब एक ही खिलाड़ी ने एक ही ओलंपिक में दो मेडल अपने नाम करने में सफलता हासिल की है। व्यक्तिगत स्पर्धा में पहले ही ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी मनु भाकर और उनके जोड़ीदार सरबजोत सिंह ने 10 मीटर पिस्टल मिक्स्ड टीम इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीत लिया है। भारत को मनु ने दूसरा मेडल दिला दिया है। मनु भाकर महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला निशानेबाज बन गई।

भारत और कोरिया के बीच खेले गए इस मुकाबले में भारत की मनु भाकर ने संयम का परिचय दिया, जबकि सरबजोत सिंह ने आदर्श खिलाड़ी की भूमिका निभाई। इस जोड़ी ने ओलंपिक में दक्षिण कोरिया को हराकर 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम स्पर्धा का कांस्य पदक जीता। भारतीय जोड़ी ने कोरियाई जोड़ी को 16-10 से हराकर देश को ओलंपिक में दूसरा पदक दिलाया। ब्रिटिश-भारतीय एथलीट नॉर्मन प्रिचर्ड ने 1900 ओलंपिक में 200 मीटर स्प्रिंट और 200 मीटर बाधा दौड़ में दो रजत पदक जीते थे, लेकिन यह उपलब्धि स्वतंत्रता-पूर्व युग में आई थी।

मनु भाकर के बारे में तो आप जान ही चुके हैं। उनका इस साल का ये दूसरा मेडल है। लेकिन उनके जोड़ीदार सरबजोत सिंह ने भी इतिहास रचा है। सरबजोत सिंह का ये पहला मेडल है। भले ही उनकी जोड़ीदार मनु रही हों, लेकिन सरबजोत ने भी जिस तरह से सटीक निशाना साधा, उससे भारत को जीत दर्ज करने में कामयाबी मिली है। इससे पहले भी सरबजोत सिंह अच्छा खेल दिखाते रहे हैं, लेकिन वे मेडल से चूक रहे थे, लेकिन इस बार उन्होंने कोई गलती नहीं की और आखिरकार भारत की झोली में एक और मेडल डालने का काम कर ही दिखाया। 

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