पीएम मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में कहा कि इसके श्रोता ही इस कार्यक्रम के असली सूत्रधार हैं। आमतौर पर ये धारणा है कि जब तक चटपटी और नकारात्मक बातें ना हों तब तक उन्हें तवज्जो नहीं मिलती हैं। लेकिन मन की बात ने ये साबित किया कि लोगों को पॉजिटिव बातें पसंद आती हैं। पीएम ने कहा कि मन की बात मेरे लिए ऐसी है, जैसे मंदिर जाकर ईश्वर के दर्शन करना। पीएम ने कहा कि मन की बात को घर-घर तक पहुंचाने वाले लोगों को धन्यवाद देना चाहता हूं। आज का एपिसोड भावुक करने वाला है। पीएम ने कहा कि ‘मन की बात’ की हमारी इस यात्रा को 10 साल पूरे हो रहे हैं। 10 साल पहले ‘मन की बात’ का प्रारंभ 3 अक्तूबर को विजयादशमी के दिन हुआ था और ये कितना पवित्र संयोग है, कि इस साल 3 अक्तूबर को जब ‘मन की बात’ के 10 वर्ष पूरे होंगे, तब नवरात्रि का पहला दिन होगा। उन्होंने कहा कि मेरा मन भी तभी गर्व से भर जाता है, जब मैं ‘मन की बात’ के लिए आई चिट्ठियों को पढ़ता हूं।
पीएम ने कहा कि इस कार्यक्रम को देश की 22 भाषाओं के साथ 12 विदेशी भाषाओं में भी सुना जा सकता है। मुझे अच्छा लगता है जब लोग ये कहते हैं कि उन्होंने मन की बात कार्यक्रम को अपनी स्थानीय भाषा में सुना। कार्यक्रम पर आधारित एक क्विज कंपटीशन भी चल रहा है, जिसमें कोई भी व्यक्ति हिस्सा ले सकता है। https://Mygov.in पर जाकर आप इस कंपटीशन में हिस्सा ले सकते हैं और ईनाम भी जीत सकते हैं।पीएम मोदी ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में जबरदस्त बारिश हो रही है। बारिश का ये मौसम, हमें याद दिलाता है कि ‘जल-संरक्षण’ कितना जरूरी है। बारिश के दिनों में बचाया गया पानी, जल संकट के महीनों में बहुत मदद करता है, और यही कैच द रेन जैसे अभियानों की भावना है।पीएम ने कहा कि कहीं नारी-शक्ति, जल-शक्ति को बढ़ाती है तो कहीं जल-शक्ति भी नारी-शक्ति को मजबूत करती है। मुझे मध्य प्रदेश के दो बड़े ही प्रेरणादायी प्रयासों की जानकारी मिली है। यहां डिंडोरी के रयपुरा गांव में एक बड़े तालाब के निर्माण से भू-जल स्तर काफी बढ़ गया है।