लोकसभा चुनाव की घोषणा के बाद अब पहले दौर के मतदान की तारीख भी करीब आ रही है। इस बीच कांग्रेस और बीजेपी के बीच एक दूसरे के खिलाफ बयानबाजी का दौर भी शुरू हो गया है। कांग्रेस की तरफ से पार्टी का घोषणापत्र भी जारी किया जा चुकी है। इस बीच चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर का राहुल गांधी का लेकर एक बयान काफी चर्चा में है। प्रशांत किशोर के इस बयान के बाद कांग्रेस नाराज नजर आ रही है। एक इंटरव्यू में प्रशांत किशोर ने राहुल गांधी को राजनीति से कुछ समय के लिए ब्रेक लेने की सलाह दी है। इस पर कांग्रेस ने प्रशांत किशोर को कंसल्टेट बताते हुए उनकी टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देने से साफ इनकार कर दिया है। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि मैं ‘कंसल्टेंट’ की बात का जवाब नहीं देती। कंसल्टेंट की बात पर क्या जवाब देना। अब सवाल उठता है कि आखिर प्रशांत किशोर ने यह टिप्पणी क्यों की। क्या प्रशांत किशोर ने अपनी टिप्पणी से कांग्रेस को आइना दिखाने का काम किया है। प्रशांत किशोर की इस टिप्पणी का इस लोकसभा चुनावों के साथ ही कांग्रेस के प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है।
आखिर प्रशांत किशोर ने कहा क्या है? दरअसल, कुछ दिन पहले प्रशांत किशोर ने एक इंटरव्यू दिया था। इस इंटरव्यू में कांग्रेस और राहुल गांधी से जुड़ा एक सवाल पूछा गया। इस पर प्रशांत किशोर ने सुझाव दिया कि यदि कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में बेहतर परिणाम नहीं मिलते हैं तो राहुल गांधी को अपने कदम पीछे खींचने पर विचार करना चाहिए। प्रशांत ने कहा था कि पिछले 10 वर्ष में अपेक्षित परिणाम नहीं देने के बावजूद वह (राहुल गांधी) न तो रास्ते से हट रहे हैं और न ही किसी और को आगे आने दे रहे हैं। प्रशांत किशोर ने कहा कि दुनियाभर में अच्छे नेताओं की एक प्रमुख विशेषता यह होती है कि वे जानते हैं कि उनमें क्या कमी है। वे सक्रिय रूप से उन कमियों को दूर करने के लिए तत्पर रहते हैं। किशोर ने कहा कि लेकिन राहुल गांधी को ऐसा लगता है कि वह सब कुछ जानते हैं। यदि ऐसा लगता है कि आपको मदद की आवश्यकता नहीं है तो कोई भी आपकी मदद नहीं कर सकता। उन्हें लगता है कि वह सही हैं और वह मानते हैं कि उन्हें ऐसे व्यक्ति की जरूरत है जो उनकी सोच को मूर्त रूप दे सके। यह संभव नहीं है। प्रशांत यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कई नेता निजी तौर पर स्वीकार करेंगे कि वे (राहुल) पार्टी में कोई भी निर्णय नहीं ले सकते, यहां तक कि गठबंधन सहयोगियों के साथ एक भी सीट या सीट शेयरिंग करने के बारे में भी वे तब तक कोई फैसला नहीं ले सकते ‘जब तक उन्हें ‘एक्सवाईजेड’ से मंजूरी नहीं मिल जाती।