‘पुष्‍पा’ के फहाद फाजिल को ये क्‍या हो गया! फिल्‍मों और ‘धर्म के कड़वे सच’ को लेकर दिया ऐसा बयान की मच गई सनसनी

साउथ के फेमस एक्टर फहाद फाजिल इन दिनों अपनी हालिया रिलीज मूवी ‘आवेशम’ को लेकर सुर्खियों में हैं। फिल्म में उन्हें उनके किरदार के लिए खूब सराहना मिल रही है। फहाद को अल्लू अर्जुन की ‘पुष्पा: द राइज’ मूवी से हिंदी बेल्ट में भी पहचान मिली। मलयालम, तेलुगू और कन्नड़ सिनेमा में अपने हुनर का परचम लहरा चुके फहाद के बयान ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि लाइफ में फिल्में देखने के अलावा और भी बहुत कुछ है। इससे सिनेमा लवर्स की भावनाएं आहत हुई हैं। इसके अलावा उन्होंने मलयालम फिल्मों में धर्म को लेकर अपनी चुप्पी तोड़ी और कहा कि वो दोबारा इसे टच नहीं करेंगे, क्योंकि लोग कड़वा सच नहीं सुनना चाहते हैं।’

जल्द ही ‘पुष्पा 2’ में नजर आने वाले एक्टर Fahadh Faasil ने गलाट्टा प्लस को दिए इंटरव्यू में कहा कि वो धर्म से जुड़े विवादित विषयों से दूर रहना पसंद करते हैं। इसके पीछे की वजह उनकी फिल्म ‘ट्रांस’ है, जो साल 2020 में रिलीज हुई और बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई।41 साल के एक्टर ने कहा, ‘केरल में धर्म से निपटने के बारे में मेरा अपनी राय है। अगर मैं कहूं तो मुझे नहीं लगता कि लोग कड़वी सच्चाई सुनना चाहते हैं। वो एंटरटेनमेंट करना चाहते हैं। ‘ट्रांस’ में एंटरटेनमेंट फैक्टर नहीं था। लेकिन बहुत सारी ऐसी चीजें थीं, जिससे जागरुकता आती, लेकिन यहीं हम असफल रहे। इसलिए केरल में कुछ समय के लिए मैं धर्म को नहीं छुऊंगा।’

सिनेमा देखने को लेकर फहाद फाजिल का कहना है, ‘मुझे समय सीमा के बारे में कोई जानकारी नहीं है, मैं न तो चीजें समय पर शुरू करता हूं और न ही उन्हें समय पर खत्म करता हूं। मेरा कोई भी प्रोजेक्ट पहले से निर्धारित नहीं है। मैं बस वही चीजें करता हूं, जिनके बारे में मुझे एक्साइटमेंट होती है। मैं हमेशा अपने दर्शकों से कहता हूं कि उनके प्रति मेरी एकमात्र जिम्मेदारी फिल्मों को देखने लायक बनाना है। मैं नहीं चाहता कि वे मेरे बारे में सोचें या मैं अपने जीवन में क्या कर रहा हूं, इसकी चिंता करें। जब तक आप सिनेमा में हैं, तब तक ही मेरे बारे में सोचें। मैं नहीं चाहता कि लोग खाने की मेज पर एक्टर्स या उनकी एक्टिंग के बारे में बात करें। बस थिएटर में या घर वापस आते समय इस पर चर्चा करें। सिनेमा इससे परे नहीं है। इसकी भी अपनी सीमाएं हैं। आपको लाइफ में फिल्में देखने के अलावा और भी बहुत कुछ करना है।’

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