उत्तराखंड में चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को इस बार हरे भरे पहाड़ों पर राख नजर आने वाली हैं। पिछले कई दिनों से धधक रहे जंगलों में हरियाली की जगह राख बिखरी नजर आएगी। प्रदेश में अभी भी कई क्षेत्रों में जंगल आग से जूझ रहे हैं। ऐसे में सरकार के सामने चारधाम यात्रा को सुरक्षित कराने की बड़ी चुनौती भी है। हालांकि सरकार ने जल्द ही जंगलों की आग पर काबू पाने का दावा किया है। उत्तराखंड में 1 नवंबर 2023 से अब तक जंगलों में आग की 910 घटनाएं हुई हैं। इससे लगभग 1145 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ है।
उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग लगभग 90 फीसदी मानव जनित है। कहीं-कहीं ग्रामीण परंपरागत तौर पर नई घास उगाने के लिए जंगल में जमीन से सूखी घास को जलाते हैं तो कहीं लोग जंगलों के पास बीड़ी या अलाव जलता छोड़ देते हैं, जिससे एक चिंगारी भीषण आग का रूप ले लेती है। कुछ लोग रील बनाने के लिए आग लगाने में भी पीछे नहीं हैं। जंगलों में लगी यह आग धीरे-धीरे आबादी तक पहुंच रही है। वन संपदा के साथ-साथ मानव नुकसान भी हो सकता है। उत्तराखंड में वनाग्नि ने अब तक पांच लोगों की जान ले ली है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि जंगलों की आग बुझाने के लिए सरकार हर मोर्चे पर काम कर रही है। सेना की सहायता लेने के साथ ही अधिकारियों को भी ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर आग पर नियंत्रण पाने के निर्देश दिए गए हैं। अराजक तत्व जंगलों में आग लगाकर वन संपदा को नुकसान पहुंच रहे हैं, उनके विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई सरकार की करेगी।
उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक अभिनव कुमार ने कहा है कि जंगलों को जलाने वालों के खिलाफ पुलिस सख्त कार्रवाई करने जा रही है। जंगलों में बार-बार आग लगाने वालों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। जिन लोगों के कारण आग लग रही है या जो आग लगा रहे हैं, उनसे ही नुकसान की भरपाई भी कराई जाएगी। ऐसे लोगों के खिलाफ पहले फॉरेस्ट प्रोटक्शन एक्ट, फिर वाइल्ड एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। डीजीपी ने बताया कि यदि कोई बार-बार आग लगाते हुए पकड़ा जाता है तो उनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।