पाकिस्‍तान, मालदीव के बाद अब बांग्‍लादेश भी जा रहा चीन के करीब, ड्रैगन की चाल से भारत की बढ़ेगी टेंशन, जानें खतरा

भारत के लिए बांग्लादेश एक भरोसेमंद पड़ोसी मुल्क रहा है। साझा इतिहास और बांग्लादेश की आजादी में भारत की भूमिका भी दोनों मुल्कों को करीब लाती है। बांग्लादेश हमेशा से भारत को अपना अच्छा दोस्त कहता रहा है लेकिन इन दोनों दोस्तों में एक तीसरे की भी जोरदार एंट्री बीते कुछ साल में हो गई है। ये तीसरा देश चीन है, जिसने तेजी से बांग्लादेश में खुद को मजबूत किया है। चीन बांग्लादेश को अपनी ओर खींचने की कोशिश कर रहा है और उसकी कोशिशों का असर भी दिख रहा है। ये बांग्लादेश के साथ संबंधों के लिहाज से ही नहीं बल्कि क्षेत्र में प्रभाव के लिए भी नई दिल्ली के लिए चिंता की बात है। पाकिस्तान में तो चीन का प्रभाव जगजाहिर है ही, श्रीलंका, नेपाल, मालदीव जैसे दूसरे पड़ोसी देशों में भी उसने हालिया सालों में खुद को तेजी से स्थापित किया है। बांग्लादेश की बात की जाए तो एक पनडुब्बी बेस, 5 अरब डॉलर की सहायता, भारत के सिलीगुड़ी गलियारे के करीब बुनियादी ढांचा परियोजनाएं, हथियार और ढाका के साथ सैन्य अभ्यास कर चीन ने भारत को साफ संकेत दे दिया है कि वह क्षेत्र में अपना दबदबा बढ़ाने पर काम कर रहा है।

डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश खासतौर से बीते कुछ सालों में चीन की ओर चला गया है। इसमें सिलीगुड़ी कॉरिडोर की बात की जाए तो इसकी तैयारी चीन ने काफी पहले शुरू कर दी थी। उसने तत्कालीन बांग्लादेश के राष्ट्रपति जनरल इरशाद को 1987 में बीजिंग में यह बयान देने के लिए मजबूर किया कि वह समदुरोंग चू घटना की पृष्ठभूमि में भारतीय सेना को बांग्लादेशी क्षेत्र के माध्यम से उत्तर-पूर्व भारत में प्रवेश की अनुमति नहीं देंगे। इसके बाद दिसंबर 2002 में चीन ने पूर्व प्रधान मंत्री खालिदा जिया के साथ एक रक्षा सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए और बांग्लादेश को 5 बिलियन डॉलर से अधिक के हथियार बेचे। सिलीगुड़ी कॉरिडोर के बहुत करीब तीस्ता नदी में चीन 1 अरब डॉलर की ड्रेजिंग परियोजना के साथ बढ़ रहा है। ये नदी नेपाल और बांग्लादेश को अलग करती है और शेष भारत को इसके उत्तर-पूर्व से महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी प्रदान करता है। भारत के साथ 2017 के डोकलाम गतिरोध के बाद चीन ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर से जम्फेरी रिज तक सड़क बनाई है।

चीन ने बांग्लादेश में अपनी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव परियोजनाओं पर चार बिलियन डॉलर खर्च किए हैं, आने वाले वर्षों में उसकी कुल 50 बिलियन डॉलर से अधिक के निवेश की योजना है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 20 साल पहले के 1.2 अरब डॉलर से बढ़कर पिछले साल 22 अरब डॉलर हो गया, जिससे भारत को पीछे छोड़ते हुए चीन बांग्लादेश का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बन गया। चीन के साथ बांग्लादेश का व्यापार घाटा लगभग 21 अरब डॉलर है, ये और बढ़ रहा है। बांग्लादेशी वस्तुओं-कपड़ा, जूट और अन्य उत्पादों के लिए अपने बाजार को खोलने की ढाका की अपील को भी चीन ने अनसुना कर दिया है।

बांग्लादेश में चीन की एक और अहम चीनी परियोजना कॉक्स बाजार के पेकुआ में बीएनएस शेख हसीना पनडुब्बी बेस है, जिसका उद्घाटन मार्च में चीन से 1.21 बिलियन डॉलर की फंडिंग के साथ किया गया था। इसमें छह पनडुब्बियों और आठ युद्धपोतों को रखा जा सकता है। इससे पहले 2016 में ही बांग्लादेश ने चीन से 205 मिलियन डॉलर में दो मिंग-श्रेणी की पनडुब्बियां और आठ युद्धपोत खरीदे थे।

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