कहां से लीक हुई आउटसोर्सिंग से भर्ती की चिट्ठी? यूपी पुलिस की जमकर हुई थी फजीहत

यूपी पुलिस में मिनिस्टीरियल स्टाफ (एएसआई लिपिक, लेखा व एसआई गोपनीय) के पदों पर आउटसोर्सिंग से भर्ती की चिट्ठी आखिर कहां से और किसने लीक की इसकी जांच शुरू हो गई है। दरअसल सोशल मीडिया पर जो चिट्ठी वायरल हुई उस पर मेरठ के एडीजी जोन दफ्तर की मुहर लगी थी। तो यह माना जा रहा है कि यह चिट्ठी मेरठ जोन के ही किसी पुलिस दफ्तर से लीक हुई है।

पुलिस में आउटसोर्सिंग से भर्ती की चिट्ठी वायरल होने के बाद यूपी में सियासी बवाल शुरू हो गया था। सपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी समेत सभी विपक्षी दलों ने इसे मुद्दा बनाकर यूपी सरकार को घेरना शुरू कर दिया था। मामले को अग्निवीर भर्ती से जोड़ दिया गया, जिसके बाद पूरा पुलिस मुख्यालय बैकफुट पर आ गया। मुख्यालय ने गलती से चिट्ठी जारी होने की बात सोशल मीडिया पर कबूली। हालांकि अफसरों ने खुद को बचाते हुए इसे मिनिस्टीरियल स्टाफ की गलती बताते हुए पल्ला झाड़ने और एक औपचारिक जांच शुरू होने की बात कही।दरअसल मामला यूपी पुलिस में मिनिस्टीरियल स्टाफ (एएसआई लिपिक, लेखा व एसआई गोपनीय) के पदों पर आउटसोर्सिंग से भर्ती से जुड़ा हुआ है। 10 जून को पुलिस मुख्यालय स्थित स्थापना के दफ्तर से सभी विभागाध्यक्षों, पुलिस कमिश्नर, एसपी व एसएसपी को एक पत्र भेजा गया।

डीआईजी स्थापना प्रभाकर चौधरी की तरफ से भेजे गए पत्र में इन सभी से कहा गया है कि एएसआई लिपिक व लेखा द्वारा इंडेक्स, चरित्र पंजिका, रिकार्ड कीपिंग व अकाउंट शाखा में वेतन, टीए जैसे कार्य किए जाते हैं। वहीं एसआई (गोपनीय) अधिकारियों के गोपनीय कार्यालय में पत्राचार का कार्य करते हैं। पुलिस विभाग में लगातार वृद्धि के चलते तात्कालिक प्रभाव से लिपिकीय संवर्ग में स्वीकृत पदों के अतिरिक्त की जरूरत है। जिसके चलते एएसआई लेखा, लिपिक व एसआई गोपनीय के पदों पर आउटसोर्सिंग से भर्ती पर विचार चल रहा है। सभी इस संबंध में 17 जून तक अपनी राय व रिपोर्ट भेज दें।यह पत्र जारी होने के कुछ घंटों के अंदर ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। दरअसल यूपी पुलिस में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों व अन्य छोटे पदों पर आउटसोर्सिंग से भर्तियां होती रहती हैं। लेकिन यह पहली बार था कि दारोगा स्तर पर आउटसोर्सिंग से भर्तियों के संबंध में विचार हो रहा था।

पत्र वायरल होने के बाद सरकार के उच्च पदस्थ पदों पर बैठे लोगों के बीच हड़कंप मच गया। मुख्यालय के अफसरों से पूछा गया कि यह मसला क्या है। क्या पत्र सही है ? ऊपर का रुख भांप अफसरों के भी हाथ पांव फूल गए। आनन-फानन में मुख्यालय की तरफ से सफाई जारी करते हुए कहा गया कि यह पत्र त्रुटिवश जारी हो गया है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती आउटसोर्सिंग से होती है। इसी के संबंध में पत्र जारी किया जाना था लेकिन गलती से मिनिस्टीरियल स्टाफ के लिए जारी हो गया। ऐसा कोई प्रस्ताव पुलिस विभाग व शासन स्तर पर विचाराधीन नहीं है। यह पत्र गलत जारी हो गया है जिसे निरस्त कर दिया गया है।मुख्यालय की तरफ से सफाई तो जारी हो गई लेकिन अफसर ये नहीं बता पा रहे हैं कि अगर चतुर्थ श्रेणी के लिए पत्र जारी होना था तो पत्र में मिनिस्टीरियल स्टाफ के संबंध में इतनी लंबी चौड़ी बातें क्यों लिखी गई थीं ? माना जा रहा कि मुख्यालय मिनिस्टीरियल स्टाफ के पदों पर आउटसोर्सिंग पर भर्ती के लिए तैयारी तो कर रहा था लेकिन ऊपर से इस संबंध में मंजूरी नहीं ली थी। इसके चलते यूपी पुलिस की फजीहत हो गई।

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