महाराष्ट्र में अवैध बांग्लादेशियों के खिलाफ एक्शन शुरू, देवेंद्र फडणवीस बोले- ‘सरकार ने अपना रुख साफ कर दिया है’

महाराष्ट्र के विधानसभा सत्र में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अवैध रूप से भारत में रहने वाले बांग्लादेशी नागरिकों को लेकर सरकार का रुख साफ कर दिया है। एक तरफ जहां राज्य में अवैध रूप से रहने वाले नागरिकों के लिए डिटेंशन सेंटर का निर्माण किया जाएगा तो वहीं सरकार की भूमिका है कि ऐसे सभी अवैध नागरिकों को डिपोर्ट किया जाए। इसे लेकर सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा, सरकार की भूमिका बिल्कुल साफ है। ऐसे सभी बांग्लादेशी नागरिक जो भारत में अवैध रूप से रह रहे हैं उन्हें खोजने और  उन्हें डिपोर्ट करना ही सरकार की भूमिका है और हमने इस काम की शुरुआत भी कर दी है। इसी तर्ज पर बीते दिनों मुंबई, नवी मुंबई, धुले, भिवंडी और राज्य के अन्य इलाकों में पुलिस द्वारा जमकर कार्यवाही की जा रही है। 

महाराष्ट्र में अवैध बांग्लादेशियों पर एक्शन शुरू

बता दें कि बीते दिनों मुंबई की कफ परेड पुलिस ने एक ऐसे बांग्लादेशी नागरिक को गिरफ्तार किया था, जो 34 साल पहले मुंबई में डंकी रूट के जरिए दाखिल हुआ था। सूत्रों ने बताया कि आरोपी बांग्लादेशी नागरिक है जो चटगांव का रहने वाला है। उसका नाम मोइन हयात बादशाह शेख साल है। महज 17 साल की उम्र में अवैध रूप से वह भारत में घुसा था। तब से वह भारत और बांग्लादेश के बीच कई बार आवाजाही कर चुका है। पुलिस ने बताया कि एंटी टेररिस्ट सेल (ATC) को जानकारी मिली थी कि एक बांग्लादेशी नागरिक यहां दक्षिण मुंबई में कई साल से रह रहा है। इसके बाद डीसीपी जोन-1 प्रवीण मुंढे ने एक टीम बनाई। इस टीम ने जांच के बाद मोइन को हिरासत में ले लिया। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी डंकी रूट से भारत आया था और इसके पास अब भारत का वोटर आईडी भी है, जिसका इस्तेमाल कर उसने लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मतदान भी किया था। 

इतना ही नहीं, शेख के पास से पुलिस को इंडिया का आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी और ड्राइविंग लाइसेंस भी मिला है। जांच में पता चला कि शेख 1990 में जब पहली बार मुंबई आया था, तब से मुंब्रा, कुर्ला, गोवंडी और परेल में बच्चों को उर्दू और कुरान पढ़ाना शुरू किया। हालांकि, उसके पास पासपोर्ट नहीं है। शेख कफ परेड के अंबेडकर नगर में एक घर का मालिक भी है, जहां वह अपने परिवार के साथ रहता है। वह आखिरी बार 2021 में बांग्लादेश गया था। पुलिस को ऐसे कई मामले मिले हैं, जिनमें न केवल आरोपियों के पास से भारत के दस्तावेज बरामद हुए हैं बल्कि वे कई बार उन दस्तावेजों की मदद लेकर विदेश यात्रा भी कर चुके हैं।

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