पासिंग आउट परेड में अनुकरणीय प्रदर्शन के साथ समूह का नेतृत्व करते हुए कैप्टन हंसजा शर्मा को फर्स्ट इन ऑर्डर ऑफ मेरिट के रूप में मान्यता दी गई है। उन्हें प्रतिष्ठित सिल्वर चीता ट्रॉफी से सम्मानित किया गया
वह भारतीय सेना की पहली ऐसी महिला अधिकारी बन गई हैं, जिन्हें यह सिल्वर चीता ट्रॉफी दी गई है। कैप्टन हंजा शर्मा की सफलता युद्ध विमानन के क्षेत्र में महिला विमान चालकों की भावी पीढ़ियों के लिए मार्ग प्रशस्त करने वाली नारी शक्ति (महिला शक्ति) की अदम्य भावना का प्रमाण है।
हंसजा शर्मा जम्मू के रिहाड़ी कॉलोनी की रहने वाली हैं। 22 साल की उम्र में हंसजा शर्मा को भारतीय सेना में पायलट चुना गया। हंसजा के नाम पर एक और गौरव है कि वह जम्मू-कश्मीर की पहली महिला सैन्य अफसर हैं।
हंसजा शर्मा एनसीसी कैडेट रही हैं। उन्होंने बताया कि बचपन से ही उन्होंने आईएएस बनने का सपना देखा था। वह उसी दिशा में पढ़ाई कर रही थीं, लेकिन कॉलेज में उन्होंने एनसीपी जॉइन की और फिर यहां से करियर का टर्निंग पॉइंट शुरू हुआ और उनकी रुची सेना में बढ़ी। उन्होंने सेना की तैयारी शुरू की और एग्जाम क्रैक करके सेना जॉइन की।