पोलियो पॉल का 78 साल की उम्र में निधन, लोहे के फेफड़े में गुजारे जिंदगी के 7 दशक,

अमेरिका में करीब 70 साल तक आयरन लंग यानी लोहे के फेफड़े की मदद से जीने वालेपॉल अलेक्जेंडर का निधन हो गया है। 78 साल की उम्र में आखिरी सांस लेने वाले अलेक्जेंडर को पोलियो पॉल के नाम जाना जाता था। इसकी वजह ये थी कि पॉल अलेक्जेंडर को 1952 में पोलियो हो गया था, जब वह सिर्फ छह साल के थे। पोलियो के लक्षण विकसित होने के बाद उन्हें टेक्सास के अस्पताल ले जाया गया। उनके फेफड़े खराब होने की वजह से उनको लोहे के बने बॉक्स ( आयरन लंग) के अंदर रखा गया।

इसके बाद उन्होंने अपना बाकी का 70 साल का जीवन ऐसे ही जिया। इसीलिए पॉल अलेक्जेंडर को दुनियाभर में ‘द मैन इन द आयरन लंग’ कहा जाने लगा। इसी मशीन के अंदर मंगलवार को उनका निधन हो गया। 1946 में पैदा हुए पॉल अलेक्जेंडर को अमेरिकी इतिहास में सबसे खराब पोलियो प्रकोप को सहन किया। छह साल की उम्र में पोलियो से पीड़ित होने के बाद 1952 में उनका गर्दन के नीचे का हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया, जिससे वह खुद से सांस लेने में असमर्थ हो गए थे।

उनको सांस लेने में मदद के लिए 600 पाउंड की लोहे की मशीन के अंदर रहने के लिए मजबूर होना पड़ा। जिसे एक तरह से वेंटिलेटर कहा जा सकता है। इसी मशीन की मदद से वह इतने साल जीवित रहे। उनका शरीर मशीन के अंदर और सिर्फ चेहरा बाहर होता था। पॉल की मौत के बाद उनके भाई फिलिप के एक संदेश में लिखा, मैं उन सभी लोगों का बहुत आभारी हूं जिन्होंने मेरे भाई के इलाज के लिए दान दिया। इससे उन्हें अपने आखिरी कुछ साल तनाव मुक्त रहने में मदद मिली।

पॉल को उनकी जिंदादिली की वजह से दुनिया में पहचान मिली थी। आयरन लंग्स नाम की मशीन के भरोसे वह सात दशक तक ना सिर्फ जिए बल्कि पढ़ाई की और फिर छात्रों को पढ़ाया भी। लोहे के बक्से जैसी इस मशीन को 50 के दशक में उन मरीजों को सांस दिलाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। जिनके फेफड़े काम करना बंद कर देते थे। इसी वजह से आयरन लंग्स कहा जाता था।

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