महाराष्ट्र: भतीजे अजित को मिली घड़ी, सुप्रीम कोर्ट में सिंबल की लड़ाई हारे शरद पवार

 एनसीपी के चुनाव चिन्ह विवाद में शरद पवार गुट को झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने शरद पवार गुट की वह याचिका खारिज कर दी। जिसमें मांग की गई थी कि अजित पवार की अगुवाई वाली एनसीपी को इसका बतौर चुनाव चिन्ह इस्तेमाल नहीं करने दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ‘घड़ी’ सिंबल का इस्तेमाल अजित पवार की पार्टी ही करेगी, हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अजित पवार गुट को निर्देश दिए किया। वह ऐसा करने से पहले पब्लिक नोटिस के जरिए लोगों को यह बताए कि एनसीपी के चुनाव चिन्ह का मामला कोर्ट में विचारधीन है। कोर्ट ने दूसरी तरफ शरद गुट की NCP शरदच्रंद पवार नाम से ही लोकसभा चुनाव 2024 लड़ने की परमिशन दे दी। कोर्ट ने उसके चुनाव चिह्न ट्रम्पेट को भी मान्यता दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को भी निर्देश दिया कि वह लोकसभा-विधानसभा चुनावों के लिए दूसरों को तुरही चुनाव चिन्ह न दे।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अजित पवार को घड़ी के इस्तेमाल की अनुमति मिल गई है। बस उन्हें चुनावी विज्ञापनों में यह बताना होगा कि NCP का घड़ी चुनाव चिह्न कोर्ट में विचाराधीन है। इससे पहले पिछली सुनवाई में अजित पवार काे झटका लगा था और कोर्ट ने कहा कि अजित पवार ग्रुप को शरद पवार की फोटो और नाम का इस्तेमाल न करे। कुछ दिन पहले ही राज्यसभा का चुनाव हुआ था। इस चुनाव के लिए केंद्रीय चुनाव आयोग ने शरद पवार गुट को तुरही और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का नाम शरद चंद्र पवार दिया था। तब चर्चा थी कि यह संकेत सिर्फ राज्यसभा चुनाव तक ही है, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने शरद पवार गुट को आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भी इस नाम और चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी है। महाराष्ट्र में इस साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होंगे।

पिछले साल 2 जुलाई को अजित पवार अपने चाचा शरद पवार को छोड़कर तमाम विधायकों के साथ बीजेपी की अगुवाई वाली महायुति सरकार में शामिल हो गए थे। इसके बाद उन्होंने एक राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी पर अपना दावा ठोंका था। महायुति में जाने पर अजित पवार को उप मुख्यमंत्री का पद मिला था। वे राज्य के पांचवीं बार उप मुख्यमंत्री बने थे। इसके बाद इस साल फरवरी में आयोग ने अजित गुट को असली एनसीपी करार दिया था। इसके बाद महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर राहुल नार्वेकर ने अजित गुट को असली एनसीपी बताते अयोग्यता की याचिकाओं को खारिज कर दिया था।

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