सनातन, राष्ट्रवाद, पाकिस्तान, जिहाद जैसे शब्द भाजपा की चुनावी शब्दावलियों में हर बार शामिल हो जाते हैं। इस बार भी इनकी गूंज सुनाई पड़ रही है। विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया के नेताओं को इन्हीं हथियारों से भाजपा घेरने की कोशिश भी करती है। भले ही भाजपा की इन बातों को चुनावी जुमलेबाजी कह कर विपक्ष खारिज करने की कोशिश करता है, लेकिन जमीनी हकीकत भाजपा के आरोपों में साफ दिखती है। पाकिस्तान अक्सर नरेंद्र मोदी की आलोचना करता है। कांग्रेस के नेता भी पाकिस्तान के प्रति सॉफ्ट कार्नर रखते हैं। इसका मूल मकसद भारतीय मुसलमानों को अपने पक्ष में करना होता है। भाजपा इन्ही वजहों से कांग्रेस और उसके नेताओं को निशाने पर लेती है। सनातन पर विपक्षी नेताओं की उल्टी-सीधी टिप्पणी पर भाजपा रिएक्ट करती है। (यूसीसी) समान नागरिक संहिता, (सीएए) नागरिकता संशोधन अधिनियम और (एनआरसी) राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर जैसी बातों को विपक्षी दल भाजपा को मुसलमान विरोधी ठहराने लगते हैं। अब तो वोट जिहाद की बात भी विपक्षी नेता करने लगे हैं। इसलिए चुनावों के वक्त अनायास ही ऐसे शब्द खूब गूंजते हैं। इस बार भी इनकी गूंज सुनाई पड़ रही है।
यह सर्वविदित है कि भारत हिन्दू बहुल देश है। इसीलिए यहां मुसलमानों, ईसाइयों और दूसरे धर्म-पंथ के लोगों को अल्पसंख्यक माना जाता है। आजादी के बाद अविभाजित भारत के तीन हिस्से हो गए। पहले पाकिस्तान अलग हुआ, फिर पाकिस्तान से कट कर बांग्लादेश अस्तित्व में आया। बहुसंख्यक हिन्दू धर्मावलंबियों के बावजूद भारत में सनातन के बारे में जिस तरह की टीका-टिप्पणी होती रहती है, वैसी बातें भारत से अलग होकर बने देशों में वहां के बहुसंख्यक मुसलमानों के इस्लाम धर्म के प्रति कभी नहीं सुनाई पड़ती। किसी से यह बात छिपी नहीं है। सबसे पहले तमिलनाडु के डीएमके नेताओं ने सनातन के बारे में उल्टी-सीधी टिप्पणी शुरू की। बाद में इसका फैलाव यूपी और बिहार तक हुआ। आश्चर्य यह कि ऐसी टिप्पणी करने वाले मुस्लिम लीडर नहीं थे। विपक्षी दलों की हिन्दू जमात के ही ज्यादातर नेताओं ने सनातन या हिंदुत्व के खिलाफ विषवमन शुरू किया। हिन्दू देवी-देवताओं की खिल्ली उड़ाई जाने लगी। हिन्दू धर्मग्रंथों के खिलाफ विपक्षी नेताओं ने आवाज उठानी शुरू की। विपक्षी नेताओं ने ऐसा इसलिए नहीं किया कि उन्हें बहुसंख्यक हिन्दुओं से कोई नफरत है, बल्कि सच तो यह है कि भाजपा को नीचा दिखाने के लिए ही ऐसा किया गया। दूसरा मकसद मुसलमानों के एकमुश्त वोट की लालसा थी।