अंतरिक्ष में अब मिल जाएंगे एलियन! वैज्ञानिकों ने खोजी दुर्लभ ग्रीनहाउस गैस, दूसरे ग्रहों पर जीवन का है संकेत

एलियन होने को लेकर हमारे दिमाग में हमेशा से सवाल रहा है। क्या एलियन सच में हैं? अगर हैं तो क्या यह ‘कोई मिल गया’ फिल्म के जादू की तरह होंगे या फिर हॉलीवुड के फिल्मों वाले विलेन की तरह होंगे? इन सवालों का जवाब भले ही न पता हो, लेकिन वैज्ञानिकों ने एलियन को खोजने से जुड़ा एक नया शोध जारी किया है। वैज्ञानिकों ने ग्रीनहाउस गैसों के एक समूह की पहचान की है, जो किसी ग्रह पर जीवन होने का संकेत दे सकते हैं। इसका इस्तेमाल उन्नत एलियन सभ्यताओं की तलाश के लिए एक मार्कर के रूप में किया जा सकता है।

एलियन होने को लेकर हमारे दिमाग में हमेशा से सवाल रहा है। क्या एलियन सच में हैं? अगर हैं तो क्या यह ‘कोई मिल गया’ फिल्म के जादू की तरह होंगे या फिर हॉलीवुड के फिल्मों वाले विलेन की तरह होंगे? इन सवालों का जवाब भले ही न पता हो, लेकिन वैज्ञानिकों ने एलियन को खोजने से जुड़ा एक नया शोध जारी किया है। वैज्ञानिकों ने ग्रीनहाउस गैसों के एक समूह की पहचान की है, जो किसी ग्रह पर जीवन होने का संकेत दे सकते हैं। इसका इस्तेमाल उन्नत एलियन सभ्यताओं की तलाश के लिए एक मार्कर के रूप में किया जा सकता है।

ग्रीनहाउस गैसें ग्लोबल वॉर्मिंग का कारण बनती हैं और इन्हें पृथ्वी पर नियंत्रित किया जाना चाहिए। लेकिन ये दूसरे ग्रहों को रहने लायक बना सकते हैं। कैलिफोर्निया रिवरसाइड विश्वविद्यालय के सह-लेखक लेखक एडवर्ड श्विटरमैन ने कहा, ‘हमारे लिए ये गैसें खराब हैं, क्योंकि हम धरती पर गर्मी को और नहीं बढ़ाना चाहते। लेकिन वे एक ऐसी सभ्यता के लिए अच्छे होंगे जो शायद हिमयुग को रोकना चाहती है या उन निर्जन ग्रहों के लिए अच्छे होंगे, जिन्हें गर्म करने की जरूरत है।’

शोधकर्ताओं ने गैसों के एक ऐसे समूह की पहचान की है, जिसे नासा के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्को का इस्तेमाल करके हमारे सौर मंडल के बाहर ग्रहों पर बेहद कम मात्रा होने पर भी पता लगाया जा सकता है। यह अध्ययन द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ था और इसमें पांच गैसों का हवाला दिया गया था, जो पृथ्वी के वायुमंडल में कम मात्रा में पाई जाती है। ज्यादातर संभावना है कि अगर इन गैसों को अंतरिक्ष में कही देखा जाता है तो वहां जीवन होगा, क्योंकि यह प्राकृतिक स्रोत से आती है। उनकी मौजूदगी जीवन होने का संकेत दे सकती है।

इन गैसों में नाइट्रोजन और फ्लोरीन या सल्फर और फ्लोरीन से बनी गैसों के साथ-साथ मीथेन, ईथेन और प्रोपेन के फ्लोराइडयुक्त संस्करण शामिल हैं। पृथ्वी पर इनका इस्तेमाल कंप्यूटर चिप बनाने जैसे उद्योगों में किया जाता है। वहीं अंतरिक्ष में इनका इस्तेमाल एलियन खोजने में किया जा सकता है। इन गैसों का एक उपसमूह सल्फर हेक्साफ्लोराइड है, जिसके पास कार्बन डाइऑक्साइड से 23,500 गुना ज्यादा गर्म करने की शक्ति है। स्टडी में कहा गया कि इस गैस की अपेक्षाकृत कम मात्रा भी एक ठंडे ग्रह को उस बिंदु तक गर्म कर सकती है, जहां उसकी सतह पर तरल पानी बनना शुरू हो जाए।

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