उत्तर प्रदेश के हाथरस में 2 जुलाई को दोपहर बाद करीब 2 बजे मची भगदड़ में 121 लोगों की मौत के मुद्दे पर कानूनी लड़ाई एक अलग स्तर पर पहुंचती दिख रही है। 2 जुलाई को हाथरस के सिकंदरामऊ इलाके में नारायण साकार हरि उर्फ भोले बाबा के सत्संग कार्यक्रम में भाग लेने के बाद जुटी भीड़ में भगदड़ मच गई थी। इसी भगदड़ में लोगों की जान गई। इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में याचिकाकर्ता ने पूरे मामले की न्यायिक जांच से लेकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला सामने आया है। कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने साफ कहा है कि हाई कोर्ट मामले की सुनवाई करने में सक्षम है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में भगदड़ की घटना को लेकर कई खामियों को उजागर किया गया। 2 जुलाई को आयोजित धार्मिक समागम में भीड़ पर निगरानी रखने और उसे नियंत्रित करने में राज्य और नगर निगम अधिकारियों की विफलता बताई गई। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को हाथरस भगदड़ की घटना को लेकर बड़ी टिप्पणी की। इसे परेशान करने वाली घटना बताया। 2 जुलाई की भगदड़ में 121 लोगों की जान चली गई थी। कोर्ट ने जनहित याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह इस त्रासदी की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में एक विशेषज्ञ समिति की नियुक्ति के लिए पहले क्षेत्राधिकार वाले हाई कोर्ट जाएं।
हाथरस केस में सरकार के स्तर पर जांच चल रही है। न्यायिक आयोग का गठन किया जा चुका है। साथ ही, घटना के अलगे दिन यानी 3 जुलाई को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 105 (गैर इरादतन हत्या), 110 (गैर इरादतन हत्या करने का प्रयास), 126(2) (गलत तरीके से रोकना), 223 (लोक सेवक की ओर से विधिवत आदेश की अवज्ञा) और 238 (साक्ष्यों को गायब करना) के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। एफआईआर में नारायण साकार हरि भोले का का नाम नहीं था। इसमें उनका ठिकाना अज्ञात बताया गया। इसके बाद 6 जुलाई को दिए गए एक वीडियो बयान में भोले बाबा ने भगदड़ की घटना पर अपना दुख व्यक्त किया।
भोले बाबा ने प्रभावित परिवारों से न्यायपालिका पर भरोसा रखने का आग्रह किया। यह बयान भोले बाबा के करीबी सहयोगी और भगदड़ के मुख्य आरोपी देव प्रकाश मधुकर की नई दिल्ली में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने के कुछ घंटों बाद आया। मधुकर भोले बाबा का ‘मुख्य सेवादार’ और हाथरस सत्संग का आयोजक था। वह अभी हिरासत में है।