गुजारा भत्ता को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को AIMPLB चैलेंज करेगा। यह फैसला आज दिल्ली में हुई बैठक में लिया गया। बोर्ड ने तर्क दिया है कि शरीयत में महिला को इद्दत पूरी होने तक ही गुज़ारा भत्ता देने का हुक्म, उसके बाद महिला आजाद है, वो दूसरी शादी कर सकती है। इसके अलावा अगर बच्चे महिला के साथ रहेंगे तो उसका खर्चा देना पति की जिम्मेदारी, बोर्ड ने यह भी तर्क दिया। पर्सनल लॉ बोर्ड का तर्क है कि भारतीय मुसलमान शरीयत के मुताबिक अपनी बेटियों को जायदाद में हिस्सेदारी दें और कानून के मुताबिक जो बात कही गई है कि अगर तलाकशुदा महिला को जिंदगी चलाने में दिक्कत आए तो अलग अलग राज्यों के वक्फ बोर्ड उसकी जिम्मेदारी उठाएं क्यूंकि बोर्ड की प्रॉपर्टी मुसलमानों की है।