राजपुर रोड स्थित वीआईपी सोसाइटी के एक फ्लैट में मिले रेडियो एक्टिव डिवाइस मामले में पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है कि यह डिवाइस असली है या नकली। इसमें मौजूद केमिकल कौन सा है और इससे क्या नुकसान हो सकता है। सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि आखिर इस डिवाइस को देहरादून ही क्यों लाया गया, क्योंकि पकड़े गए आरोपियों में से कोई भी उत्तराखंड का नहीं है। फिर इसका सौदा देहरादून में एक पूर्व आयकर अधिकारी के फ्लैट पर किए जाने का क्या कारण है।पुलिस ने इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि पूर्व आयकर अधिकारी श्वेताभ सुमन फरार चल रहे हैं। इस रेडियो एक्टिव डिवाइस में रेडियो एक्टिव पदार्थ न होने से पुलिस, प्रशासन और रेडिएशन इमरजेंसी रिस्पांस टीम ने राहत की सांस ली है। दूसरी तरफ डिवाइस में मौजूद केमिकल को लेकर संदेह बना हुआ है, जिसकी जांच रिपोर्ट का पुलिस को इंतजार है। रेडियो एक्टिव डिवाइस में कौन सा केमिकल है? इसे देहरादून लाने और यहां से करोड़ों रुपये में सौदा होने के साथ ही इस केमिकल से होने वाले नुकसान को लेकर सभी में उत्सुकता बनी हुई है।
श्वेताभ सुमन इस मामले में फरार हैं और उसकी तलाश की जा रही है। इस प्रकरण में पुलिस ने आरोपियों पर धाराओं में वृद्धि भी की है। डिवाइस के असली या नकली होने को लेकर भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र से भी मदद ली जा रही है। नरौरा परमाणु केंद्र की टीम इस डिवाइस में रेडियो एक्टिव पदार्थ नहीं होने की प्राथमिक तौर पर पुष्टि कर चुकी है। हालांकि एसएसपी अजय सिंह का कहना है कि डिवाइस के साथ मौके पर बरामद किए गए केमिकल की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। बरामद डिवाइस और केमिकल को कोर्ट के माध्यम से बाबा परमाणु अनुसंधान केंद्र भेजा जाएगा। अगर डिवाइस असली है तो पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी कि यह संवेदनशील डिवाइस आम लोगों तक कैसे पहुंचा।